प्रकाशित - 14 Oct 2024
दिवाली का त्योहार आने वाला है, किसानों की खुशी को दुगुना करने के लिए राज्य सरकार की ओर से किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिए जाने का फैसला किया गया है। इसको लेकर अधिकारियों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि किसानों को दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी किसान मुआवजा राशि से वंचित न रहे। ऐसे में राज्य के सभी पात्र किसानों को मुआवजा राशि का वितरण दिवाली से पहले किया जाएगा। इस साल अधिक बारिश और बाढ़ से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसे दखते हुए राज्य सरकार की ओर से उनके नुकसान की भरपाई की जा रही है। प्रदेश के किसानों को मुआवजा राशि का वितरण किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसानों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
समीक्षा बैठक के दौरान कृषि विभाग के विशेष सचिव वीरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि प्रथम चरण में आई बाढ़ से प्रदेश के 16 जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं दूसरे चरण में आई बाढ़ के कारण 18 जिलों में फसलों को क्षति हुई है। ऐसे में विभाग द्वारा प्रथम चरण के लिए फसल क्षति के रूप में 229 करोड़ रुपए तथा दूसरे चरण के लिए 261 करोड़ रुपए का आंकलन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के लिए फसल क्षति की 229 करोड़ रुपए की राशि विभाग को प्राप्त हो गई है।
यदि आप बिहार के किसान है और आपकी फसल को भारी बारिश या बाढ़ से नुकसान हुआ है तो आपको फसल नुकसान का मुआवजा प्रदान किया जाएगा, क्योंकि अभी बिहार सरकार की ओर से किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिए जाने का ऐलान किया गया है। इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों को दीपावली से पहले फसल क्षति की राशि उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिदायत दी कि फसल क्षति की राशि पाने से कोई किसान नहीं छूटना चाहिए। बाढ़ के दौरान जिन किसानों की फसल को क्षति हुई है, उन सभी को राशि अवश्य मिल जाए। इसके लिए कृषि विभाग तेजी से काम करे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 19 जिलों के 92 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हुए। कुल 673 पंचायतों में करीब 2,24,597 हेक्टेयर रकबा में फसल को नुकसान हुआ। इसके अलावा 91,817 हैक्टेयर में फसल को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने का अनुमान है। वहीं बाढ़ से हाजीपुर के कर्णपुरा, राधोपुर के सरायपुर, तेरसिया व उसके आसपास के दियारा क्षेत्र में केले की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा। विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ प्रभावित उक्त प्रखंडों में 534 एकड़ में लगी केले की फसल को भारी नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री ने राज्य में दूसरे चरण में आई बाढ़ से प्रभावित 18 जिलों के करीब 3.21 लाख परिवारों को डीबीटी के माध्यम से सीधे सहायता राशि उनके खातों में भेजी है। इसके लिए प्रति परिवार 7 हजार रुपए की राशि के हिसाब से कुल 225.25 करोड़ रुपए की राहत राशि जारी की गई है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रथम चरण में 4 लाख 38 हजार 529 परिवारों के खाते में 306.97 करोड़ रुपए अंतरित किए गए हैं। वहीं दूसरे चरण में 3 लाख 21 हजार 792 परिवारों के खाते में 225.25 करोड़ रुपए की राशि भेजी गई है। इस तरह कुल 7 लाख 60 हजार 321 परिवारों के खाते में 532.22 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की गई है।
बिहार के साथ ही यूपी सरकार ने भी बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए तीन लाख से अधिक किसानों को 163.151 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि की है। यह राशि यूपी में बाढ़ प्रभावित 3,12,866 किसानों को बतौर मुआवजा जारी की गई है। इसमें सबसे अधिक मुआवजा राशि 1.10 लाख से अधिक किसानों को 70 करोड़ रुपए से अधिक जारी की गई है। राहत आयुक्त भानुचंद्र गोस्वामी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में हुए फसल नुकसान का सर्वे कराया गया जिसमें 34 जिलों की 110989.26 हैक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी। राहत आयुक्त के अनुसार बाढ़ से 3,71,370 किसानों की फसलें प्रभावित हुई जिसके एवज में अब तक 3,12,866 किसानों को 163.151 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है।
यूपी में सबसे अधिक लखीमपुर खीरी के 1,10,990 किसानों की फसल बाढ़ से प्रभावित हुई इसके एवज में अब तक 1,10,105 किसानों को 70.88 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इसी प्रकार ललितपुर के 81,839 किसानों की फसल बाढ़ से प्रभावित हुई जिसमें से अब तक 54,462 किसानों को 21.9 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। वहीं सिद्धार्थनगर में 30,144 किसानों की फसलें बाढ़ से प्रभावित हुई जिसमें से 29,361 किसानों को 15.41 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है। इस तरह अब तक प्रदेश के 98 प्रतिशत किसानों को बाढ़ से फसलों की क्षति का मुआवजा दिया जा चुका है। बता दें कि यूपी व बिहार में नेपाल द्वारा पानी छोड़ने पर बाढ़ जैसे हालत हो गए और किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।
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